एंटी नक्सल अभियान को बड़ी सफलता: एमएमसी विशेष नक्सल समिती के प्रवक्ता अनंत नागपुरे सहित 11 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
गोंदिया में बड़ी सफलता: एमएमसी के प्रवक्ता अनंत नागपुरे समेत 11 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
गोंदिया (महाराष्ट्र), शुक्रवार रात एंटी नक्सल अभियान में सुरक्षाबलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली। महाराष्ट्र मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ विशेष जोनल कमेटी (एमएमसी) के प्रवक्ता अनंत उर्फ विकास नागपुरे और उनके 11 साथियों ने गोंदिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। सभी नक्सलियों ने पुलिस महानिदेशक अंकित गोयल के सामने हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया।
इस आत्मसमर्पण के बाद यह खुलासा हुआ कि इन सभी नक्सलियों पर विभिन्न राज्यों ने कुल 89 लाख रुपये का इनाम रखा था। आत्मसमर्पण करने वालों में एमएमसी के प्रमुख सदस्य अनंत नागपुरे, डीवीसीएम कमांडर नागसु गोलू वड्डे, रानो पोरेटी, संतु पोरेटी, संगीता पंधरे, प्रताप बंतूला, अनुजा कारा, पुजा मुडीयम, दिनेश सोट्टी, शीला मडावी और अर्जुन दोडी शामिल हैं।
आत्मसमर्पण की प्रक्रिया का अहम मोड़
यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण का सिलसिला तेज हुआ है। हाल ही में महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भूपति उर्फ सोनू दादा और रूपेश दादा के आत्मसमर्पण के बाद, नक्सलियों की बड़ी संख्या ने खुद को पुलिस के हवाले किया। एमएमसी जोनल कमेटी के प्रवक्ता अनंत ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर एक जनवरी 2026 तक का समय मांगा था, ताकि वे अपने अन्य साथियों के साथ सामूहिक आत्मसमर्पण कर सकें। हालांकि, छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया और केवल 15 दिनों का समय दिया था।
36 घंटे में किया आत्मसमर्पण
पिछले गुरुवार को अनंत नागपुरे ने फिर से एक पत्र जारी किया, जिसमें एक जनवरी 2026 तक आत्मसमर्पण की अनुमति मांगी थी। इस पत्र के महज 36 घंटे बाद ही अनंत और उनके 11 साथी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके थे। इस कदम से यह साफ हो गया कि नक्सलियों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है और सुरक्षाबलों के लिए यह एक बड़ी सफलता है।
मुख्यधारा में स्वागत
गोंदिया पुलिस उप महानिरीक्षक अंकित गोयल ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत करते हुए उन्हें संविधान की प्रति और गुलाब भेंट किया। यह संकेत है कि नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पुनर्वास और समाज में मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलेगा।
इस आत्मसमर्पण को सुरक्षाबलों और पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल नक्सल गतिविधियों में कमी आएगी, बल्कि शांति और सुरक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ेगा।
