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CJI गवई ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नई बिल्डिंग की रखी नींव, कहा – ‘यह न्याय का मंदिर बने, 7-स्टार होटल नहीं’

CJI गवई ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नई बिल्डिंग की रखी नींव, कहा – ‘यह न्याय का मंदिर बने, 7-स्टार होटल नहीं’

CJI गवई ने बॉम्बे हाई कोर्ट की नई इमारत की नींव रखी, कहा- ‘यह न्याय का मंदिर बने, 7-स्टार होटल नहीं’

मुंबई: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड गवई ने बुधवार को मुंबई में बॉम्बे हाई कोर्ट की नई इमारत की नींव रखी। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह इमारत सिर्फ न्याय का मंदिर बने, न कि किसी 7-स्टार होटल की तरह। CJI गवई ने बांद्रा (पूर्व) में आयोजित एक समारोह में इस परियोजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह इमारत संविधान के लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाए और किसी साम्राज्यवादी ढांचे की तरह न दिखे।

इस परियोजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत का अनुमान है, और CJI ने इस निर्माण में फिजूलखर्ची से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कोर्ट की इमारत की योजना में जजों की जरूरतों का ध्यान तो रखा जाएगा, लेकिन इसे आम नागरिकों और मुकदमेबाजों की जरूरतों के हिसाब से भी डिज़ाइन किया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह इमारत न्याय का मंदिर बने, 7-स्टार होटल नहीं।”

‘इमारत की भव्यता से ज्यादा न्यायिक उद्देश्य महत्वपूर्ण’

CJI ने कहा, “कोर्ट के निर्माण में हम जजों की सुविधा का ध्यान रखते हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम यहां नागरिकों की सेवा के लिए हैं, जो न्याय की तलाश में आते हैं। यह इमारत समाज के सबसे अंतिम नागरिक तक इंसाफ पहुंचाने के उद्देश्य से बनी होनी चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इमारत के निर्माण को लेकर फिजूलखर्ची का आरोप लगाया गया था। हालांकि, CJI ने साफ किया कि इस प्रोजेक्ट में एक लिफ्ट को दो जजों के बीच साझा करने का प्रावधान है, और इसका उद्देश्य अत्यधिक खर्च से बचना है।

CJI का यह अंतिम कार्यकाल, महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण यात्रा

CJI गवई ने अपनी यात्रा के दौरान यह भी कहा कि यह उनकी अंतिम यात्रा है क्योंकि उनका कार्यकाल 24 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा इस बात से हिचकिचा रहा था कि इस आयोजन में शामिल होऊं, लेकिन जब मुझे यह एहसास हुआ कि यह मेरी आखिरी यात्रा है, तो मैंने इस क्षण को संजोने का निर्णय लिया।”

उन्होंने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट में अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान वे हमेशा इस बात से खुश थे कि इस अद्भुत न्यायिक ढांचे में अपनी भूमिका निभाई।

न्यायपालिका की भूमिका

CJI गवई ने इस मौके पर न्यायपालिका के महत्वपूर्ण कर्तव्यों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को हमेशा मुकदमेबाजों की सेवा के लिए काम करना चाहिए, और यह इमारत भी उन्हीं के हित में बनाई जाएगी, ताकि समाज में इंसाफ का प्रभावी वितरण किया जा सके।

इस इमारत का निर्माण मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर होगा, और पूरी होने पर यह शहर के सबसे आइकॉनिक ढांचों में से एक बन जाएगी। CJI गवई ने महाराष्ट्र में न्यायिक इमारतों के निर्माण के बारे में भी बात की और कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान राज्य में कई महत्वपूर्ण न्यायिक भवनों का उद्घाटन किया है।

न्याय का मंदिर, न कि आलीशान इमारत

CJI गवई ने अंत में यह भी दोहराया कि बॉम्बे हाई कोर्ट की नई इमारत न्याय का मंदिर बनेगी, और इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रियाओं को बेहतर और प्रभावी बनाना है, न कि किसी आलीशान और फिजूलखर्ची वाली संरचना का निर्माण करना।

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