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राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी और ‘लोकतांत्रिक परिवर्तन’ पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत – शताब्दी संदेश में दिए बड़े संकेत

राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी और ‘लोकतांत्रिक परिवर्तन’ पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत – शताब्दी संदेश में दिए बड़े संकेत

मोहन भागवत का शताब्दी संबोधन: राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया स्पष्ट संदेश

नागपुर, 2 अक्टूबर:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित शताब्दी वर्ष समारोह में अपने वार्षिक संबोधन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से रखा।

अपने व्यापक संबोधन में उन्होंने देश की सीमाओं पर बढ़ते खतरे, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों और वैश्विक ताकतों के बीच भारत की भूमिका को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही।

आतंकवाद और सुरक्षा नीति पर तीखा रुख

भागवत ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के नागरिकों को धर्म के आधार पर निशाना बनाना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने सरकार और सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई की सराहना की और इसे ‘पुरजोर उत्तर’ बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अब यह भली-भांति समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर कौन सच्चा मित्र है और कौन नहीं। “हमारी मित्रता सबके लिए है, लेकिन सुरक्षा के मोर्चे पर कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए,” उन्होंने कहा।

आंतरिक सुरक्षा और नक्सलवाद पर संतुलित दृष्टिकोण

भागवत ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की कठोर कार्रवाई की सराहना की, लेकिन यह भी जोड़ा कि वहां के लोगों को न्याय, शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना equally ज़रूरी है।

स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की ओर फिर एक आह्वान

देश की आर्थिक दिशा पर बोलते हुए उन्होंने स्वदेशी मॉडल को समय की ज़रूरत बताया। भागवत ने वैश्विक व्यापार और टैरिफ नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत को किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

“दुनिया आपस में जुड़ी है, लेकिन आत्मनिर्भरता ही दीर्घकालिक समाधान है,” उन्होंने कहा। उन्होंने युवाओं और उद्योगों से ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

पड़ोसी देशों में अस्थिरता पर चिंता

श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में हालिया राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए, भागवत ने हिंसक आंदोलनों की निंदा की और लोकतांत्रिक मार्ग को ही परिवर्तन का सही तरीका बताया। उन्होंने आगाह किया कि अराजकता से बाहरी ताकतों को हस्तक्षेप का अवसर मिलता है।

पर्यावरण और संतुलित विकास की वकालत

अपने भाषण के अंतिम चरण में भागवत ने पर्यावरणीय असंतुलन की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में आए प्राकृतिक प्रकोपों का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि यदि विकास की दिशा में बदलाव नहीं किया गया तो इसका दीर्घकालिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

महापुरुषों को श्रद्धांजलि

गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के अवसर पर, उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को सादगी, सेवा और बलिदान के प्रतीक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

विजयादशमी के इस ऐतिहासिक अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रीगण और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी समारोह में शामिल हुए।

 

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