Headline
“यवतमाल: आर्णी में बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की कटाई, जंगली जानवरों और जंगल की सुरक्षा को खतरा”
“नितिन नबीन बने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष, संसदीय बोर्ड का फैसला; बिहार सरकार में मंत्री पद पर हैं वर्तमान में”
“शिवसेना को भाजपा में मर्ज करने का मिला आदेश, शशिकांत शिंदे ने एकनाथ शिंदे को लेकर किया बड़ा दावा”
“एक्शन मोड में कृषि विभाग; बुलढाणा जिले में 317 केंद्रों का निरीक्षण, 33 केंद्रों को बिक्री बंद करने के आदेश”
“विदर्भ सोलर क्षेत्र में बनेगा नंबर एक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंतिम सप्ताह प्रस्ताव में गिनाई सरकार की उपलब्धियां”
“‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस की महारैली, खरगे और राहुल रामलीला मैदान से उठाएंगे हुंकार”
“खटीमा में तुषार की हत्या के बाद हुआ बवाल, पुलिस ने आरोपी हाशिम का किया हाफ एनकाउंटर, धारा 163 भी लागू”
“एसडीपीओ जाधव के निलंबन की मांग पर मुनगंटीवार और वडेट्टीवार ने विधानसभा में किया हंगामा”
नाना पटोले ने राज्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग की, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने खारिज किया

महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव: नया आरक्षण रोटेशन नियम, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा

महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव: नया आरक्षण रोटेशन नियम, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा

जिला परिषद चुनावों में आरक्षण रोटेशन को लेकर विवाद, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

मुंबई, 16 सितंबर: महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनावों के लिए लागू किए गए नए आरक्षण रोटेशन नियम को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के नए आरक्षण रोटेशन नियम को संविधान के विरुद्ध बताते हुए इसे चुनौती दी है। उनका आरोप है कि यह नियम न केवल जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन करता है, बल्कि मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को भी प्रभावित करता है।

विवाद का केंद्र है नियम 12, जिसके तहत 1996 से 2002 के बीच हुए चुनावों को आरक्षण रोटेशन के लिए अमान्य माना गया है। इसके चलते सरकार ने 2025 के चुनाव को “पहला चुनाव” मानते हुए नई गणना शुरू की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से किया गया है और इससे आरक्षण की पारंपरिक प्रक्रिया में असंतुलन पैदा होगा।

सरकार की ओर से दलील दी गई कि यह नया नियम चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के इरादे से लागू किया गया है। उनका दावा है कि इससे आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में स्थायित्व और स्पष्टता आएगी।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाले मामले में जल्द ही निर्णय सुनाएगा।

अब सभी की नजरें अदालत के उस अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो राज्य के स्थानीय स्वशासन चुनावों की दिशा और भविष्य की आरक्षण प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top