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अमरावती में भारी बारिश का कहर: 2,224 हेक्टेयर फसलें तबाह, 89 मकान ढहे, एक बच्चे समेत 6 मवेशियों की मौत

अमरावती में भारी बारिश का कहर: 2,224 हेक्टेयर फसलें तबाह, 89 मकान ढहे, एक बच्चे समेत 6 मवेशियों की मौत

अमरावती में बारिश बनी आफ़त: फसलें बर्बाद, पुल बहा, एक बच्चे समेत छह की मौत, गांवों में फंसे नागरिक

अमरावती, 18 अगस्त — अमरावती ज़िले में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश ने तबाही मचाई है। कुछ घंटों की तेज़ बारिश ने ज़िले के किसानों और ग्रामीणों की कमर तोड़ दी। अब तक कुल 2,234 हेक्टेयर में खड़ी फसलें नष्ट हो चुकी हैं, वहीं 89 मकान गिर गए हैं। बिजली गिरने और बाढ़ के चलते छह मवेशियों और एक मासूम बच्चे की मौत की पुष्टि हुई है।

तिवसा तहसील में तबाही का आलम

तिवसा राजस्व मंडल में भारी वर्षा दर्ज की गई, जहां वणी-सुल्तानपुर मार्ग का मुख्य यातायात पुल तेज बहाव में बह गया, जिससे कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। यह पुल पिछले 30 वर्षों से यातायात का प्रमुख मार्ग था, जिसे जिला परिषद ने बनाया था। अधिकारियों की लापरवाही और मौसम विभाग की चेतावनियों के बावजूद कोई पूर्व तैयारी नहीं की गई, नतीजतन पुल पानी के तेज बहाव को सहन नहीं कर सका।

नंदगांव खंडेश्वर में नदी बनी संकट

इसी तरह नंदगांव खंडेश्वर तहसील के गोलेगांव और जगतपुर गांवों के बीच बहने वाली साहिल नदी में बाढ़ के कारण करीब 50 ग्रामीण नदी के किनारे फंस गए। दोनों गांवों को जोड़ने वाला पुल पिछले दो वर्षों से अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई, फिर भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी।

दरियापुर तहसील में किसानों पर दोहरी मार

दरियापुर में भी हालात बेहद खराब हैं। तहसील के 1,488 किसान प्रभावित हुए हैं, जबकि 1,558 हेक्टेयर से अधिक फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। नौ गांवों के 23 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन किसान तत्काल सर्वेक्षण और मुआवज़े की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन पर उठे सवाल

गांव सासन-रामपुर के ग्रामीणों और युवा सेना के तहसील प्रमुख सागर गिरहे ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पिछले वर्ष निरीक्षण के दौरान यह आश्वासन दिया था कि अगली बारिश में गांव में पानी नहीं घुसेगा, लेकिन इस बार भी हालात पहले जैसे ही बने रहे। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल खेतों और तालाबों का पानी बस्तियों में घुस जाता है, जिससे बार-बार नुकसान होता है, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलते हैं।

अब ज़रूरत है तत्काल कार्रवाई की

जिले के कई हिस्सों में बाढ़ और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ग्रामीणों और किसानों की ओर से लगातार यह मांग की जा रही है कि तुरंत सर्वे किया जाए, नुकसान का सही आंकलन कर राहत और मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, लंबे समय से अटके हुए बुनियादी ढांचे के कामों को प्राथमिकता से पूरा किया जाए ताकि हर साल इस तरह की त्रासदी से लोगों को जूझना न पड़े।

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