फिनले मिल के मज़दूरों का फिर से चिमनी पर चढ़कर प्रदर्शन, विधायक प्रवीण तायडे की मध्यस्थता के बावजूद नहीं मिला वेतन

फिनले मिल में मजदूरों का फिर चिमनी पर चढ़कर विरोध, वेतन न मिलने से फूटा ग़ुस्सा
अमरावती की बंद पड़ी फिनले मिल में मजदूरों का ग़ुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है। तीन से चार सालों से वेतन और बोनस के बकाए की मार झेल रहे मज़दूरों ने गुरुवार को दोबारा मिल की चिमनी पर चढ़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पहले भी ऐसा ही विरोध मार्च में देखा गया था, जब मज़दूर मनोज रामसिंह सूर्यवंशी और विकेश नरेश उद्दे ने चिमनी पर चढ़कर वेतन और मिल दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था।
उस प्रदर्शन के बाद विधायक प्रवीण तायडे ने मध्यस्थता करते हुए मुंबई से एनटीसी के अधिकारियों को अचलपुर बुलाया और लिखित में वादा करवाया था कि मजदूरों को दो माह का वेतन तत्काल दिया जाएगा। हालांकि, दो महीने बीत जाने के बावजूद न तो वेतन मिला और न ही बोनस की कोई जानकारी सामने आई। इससे आक्रोशित होकर मजदूरों ने एक बार फिर उसी अंदाज़ में विरोध जताया – चिमनी पर चढ़कर।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द वेतन का भुगतान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन मजदूरों का कहना है कि रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है, और प्रशासन की चुप्पी ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
ट्रेड यूनियनों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और राज्य सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मजदूरों का धैर्य अब जवाब दे रहा है और समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिनले मिल की यह स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि बंद पड़ी मिलों और उनके मजदूरों की सुध कौन लेगा?
