Headline
“यवतमाल: आर्णी में बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की कटाई, जंगली जानवरों और जंगल की सुरक्षा को खतरा”
“नितिन नबीन बने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष, संसदीय बोर्ड का फैसला; बिहार सरकार में मंत्री पद पर हैं वर्तमान में”
“शिवसेना को भाजपा में मर्ज करने का मिला आदेश, शशिकांत शिंदे ने एकनाथ शिंदे को लेकर किया बड़ा दावा”
“एक्शन मोड में कृषि विभाग; बुलढाणा जिले में 317 केंद्रों का निरीक्षण, 33 केंद्रों को बिक्री बंद करने के आदेश”
“विदर्भ सोलर क्षेत्र में बनेगा नंबर एक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंतिम सप्ताह प्रस्ताव में गिनाई सरकार की उपलब्धियां”
“‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस की महारैली, खरगे और राहुल रामलीला मैदान से उठाएंगे हुंकार”
“खटीमा में तुषार की हत्या के बाद हुआ बवाल, पुलिस ने आरोपी हाशिम का किया हाफ एनकाउंटर, धारा 163 भी लागू”
“एसडीपीओ जाधव के निलंबन की मांग पर मुनगंटीवार और वडेट्टीवार ने विधानसभा में किया हंगामा”
नाना पटोले ने राज्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग की, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने खारिज किया

फिनले मिल के मज़दूरों का फिर से चिमनी पर चढ़कर प्रदर्शन, विधायक प्रवीण तायडे की मध्यस्थता के बावजूद नहीं मिला वेतन

फिनले मिल के मज़दूरों का फिर से चिमनी पर चढ़कर प्रदर्शन, विधायक प्रवीण तायडे की मध्यस्थता के बावजूद नहीं मिला वेतन

फिनले मिल में मजदूरों का फिर चिमनी पर चढ़कर विरोध, वेतन न मिलने से फूटा ग़ुस्सा

अमरावती की बंद पड़ी फिनले मिल में मजदूरों का ग़ुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है। तीन से चार सालों से वेतन और बोनस के बकाए की मार झेल रहे मज़दूरों ने गुरुवार को दोबारा मिल की चिमनी पर चढ़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पहले भी ऐसा ही विरोध मार्च में देखा गया था, जब मज़दूर मनोज रामसिंह सूर्यवंशी और विकेश नरेश उद्दे ने चिमनी पर चढ़कर वेतन और मिल दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था।

उस प्रदर्शन के बाद विधायक प्रवीण तायडे ने मध्यस्थता करते हुए मुंबई से एनटीसी के अधिकारियों को अचलपुर बुलाया और लिखित में वादा करवाया था कि मजदूरों को दो माह का वेतन तत्काल दिया जाएगा। हालांकि, दो महीने बीत जाने के बावजूद न तो वेतन मिला और न ही बोनस की कोई जानकारी सामने आई। इससे आक्रोशित होकर मजदूरों ने एक बार फिर उसी अंदाज़ में विरोध जताया – चिमनी पर चढ़कर।

प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द वेतन का भुगतान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन मजदूरों का कहना है कि रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है, और प्रशासन की चुप्पी ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

ट्रेड यूनियनों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और राज्य सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मजदूरों का धैर्य अब जवाब दे रहा है और समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिनले मिल की यह स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि बंद पड़ी मिलों और उनके मजदूरों की सुध कौन लेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top