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गणेशोत्सव 2025: पीओपी मूर्तियों पर अब लाल निशान अनिवार्य, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

गणेशोत्सव 2025: पीओपी मूर्तियों पर अब लाल निशान अनिवार्य, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

गणेशोत्सव 2025: पीओपी मूर्तियों पर अब अनिवार्य होगा लाल निशान, सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया कदम

मुंबई, 3 अगस्त – गणेशोत्सव 2025 से पहले महाराष्ट्र सरकार ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। अब प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी गणेश मूर्तियों पर लाल रंग का विशेष चिन्ह लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे इन्हें आसानी से पहचाना जा सके। यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा जारी नई मार्गदर्शक गाइडलाइन्स के तहत लागू किया गया है।

लाल निशान से होगी पहचान

नई व्यवस्था के तहत राज्य में बनने और बिकने वाली सभी पीओपी मूर्तियों पर एक स्पष्ट लाल निशान लगाना होगा। यह चिह्न मूर्ति के पीओपी से बने होने का संकेत देगा, ताकि विसर्जन के समय प्रशासन और आम लोग इन मूर्तियों की पहचान कर सकें और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

यह नियम मूर्ति निर्माताओं, विक्रेताओं और सार्वजनिक आयोजनों से जुड़े गणेश मंडलों पर लागू होगा।

पर्यावरण बचाने की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का यह निर्णय पीओपी मूर्तियों से होने वाले जल प्रदूषण को कम करने की मंशा से लिया गया है। पीओपी न तो आसानी से जल में घुलता है और न ही जैविक रूप से नष्ट होता है। इसके साथ उपयोग होने वाले रंगों और रसायनों से पानी विषैला हो जाता है, जिससे जलीय जीवन को खतरा होता है।

नई गाइडलाइन में और क्या है खास?

  • मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं।
  • कृत्रिम विसर्जन कुंडों की व्यवस्था सभी नगर निगमों और ग्राम पंचायतों द्वारा की जाएगी।
  • सार्वजनिक स्थलों पर केवल इको-फ्रेंडली मूर्तियों के विसर्जन की अनुमति दी जाएगी।
  • प्रशासन को अधिकार दिया गया है कि वह बाजार में बिक रही मूर्तियों की जांच कर सके और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई करे।
  • शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को हरित गणेशोत्सव मनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

‘हरित गणेशोत्सव’ की अपील

राज्य सरकार ने सभी गणेश मंडलों, मूर्तिकारों और नागरिकों से अपील की है कि वे इस वर्ष “हरित गणेशोत्सव” को अपनाएं और पारंपरिक आस्था को पर्यावरण सुरक्षा के साथ जोड़ें।

सरकार का यह कदम न केवल त्योहार को अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ बनाने की ओर बढ़ाया गया प्रयास है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल स्रोत और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक सार्थक पहल है।

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