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NSE IPO अपडेट: क्या 8 साल का इंतजार होगा खत्म? SEBI से मंजूरी में क्या अड़चनें आ रही हैं?

NSE IPO अपडेट: क्या 8 साल का इंतजार होगा खत्म? SEBI से मंजूरी में क्या अड़चनें आ रही हैं?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO अब भी अधर में, निवेशकों का 8 साल लंबा इंतजार जारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ का निवेशक वर्ष 2016 से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। उस समय एनएसई ने अपने 22% शेयर्स बेचकर करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी और इसके लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास आवेदन भी दाखिल किया गया था।

हालांकि, पिछले आठ वर्षों से NSE और SEBI के बीच इस प्रस्ताव को लेकर संवाद और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा जारी है। अभी तक आईपीओ को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है, जिससे निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कुछ नियामकीय मुद्दों और पारदर्शिता को लेकर सवालों के चलते यह देरी हो रही है।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या NSE और SEBI के बीच लंबी खींचतान जल्द किसी नतीजे पर पहुंचेगी और क्या 8 साल से अटका यह IPO आखिरकार निवेशकों के लिए दरवाजे खोलेगा?

नई दिल्ली, पीटीआई। NSE IPO पर फिर बढ़ी हलचल, 8 साल बाद भी लॉन्च पर संशय बरकरार

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) एक बार फिर चर्चा में है। निवेशकों को इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ का पिछले आठ वर्षों से इंतजार है, लेकिन अब तक इसकी लॉन्चिंग को लेकर कोई स्पष्टता नहीं बन पाई है। NSE ने पहली बार 2016 में इस IPO के लिए आवेदन किया था, जिसमें करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना थी।

हालांकि, नियामकीय पेचिदगियों और सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के साथ जारी तकनीकी चर्चाओं के कारण यह प्रस्ताव अब तक लंबित है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने पुष्टि की है कि दोनों संस्थाएं इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और जो भी अड़चनें हैं, उन्हें दूर करने की कोशिश की जा रही है।

क्या हैं IPO में आ रही अड़चनें?

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी को इस आईपीओ से संबंधित प्रबंधन, तकनीकी संरचना और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी कई खामियां दिखाई दे रही हैं। इन्हीं कारणों के चलते अब तक IPO को हरी झंडी नहीं मिल सकी है।

NOC के लिए फिर किया आवेदन

NSE ने हाल ही में सेबी के पास नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के लिए दोबारा आवेदन किया है। लेकिन, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि IPO को निवेशकों के लिए कब लॉन्च किया जाएगा।

सेबी चेयरमैन का कहना है कि यह मामला केवल प्रक्रिया की देरी नहीं, बल्कि कुछ मौलिक और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों का समाधान खोजने का है। NSE द्वारा समय-समय पर सेबी से क्लियरेंस के लिए किए गए कई प्रयासों के बावजूद मामला फिलहाल अनिश्चितता में है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या NSE और SEBI के बीच चल रही बातचीत किसी ठोस नतीजे तक पहुंचती है और क्या निवेशकों का वर्षों पुराना इंतजार आखिरकार खत्म हो पाएगा?

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