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सहरसा: सरकारी स्कूलों में अभिभावकों की सहमति के बिना नहीं होंगे बच्चे रिपीटर, नया आदेश जारी

सहरसा: सरकारी स्कूलों में अभिभावकों की सहमति के बिना नहीं होंगे बच्चे रिपीटर, नया आदेश जारी

सहरसा: सरकारी स्कूलों में अब आठवीं तक के बच्चों को अभिभावकों की सहमति के बिना रिपीटर नहीं बनाया जा सकेगा, नया आदेश जारी

सहरसा: सरकारी स्कूलों में अब आठवीं कक्षा तक के बच्चों को बिना अभिभावकों की सहमति के रिपीटर नहीं बनाया जा सकेगा। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में एक अहम आदेश जारी किया है, जिसके तहत किसी भी बच्चे को पिछली कक्षा में नहीं रखा जाएगा। सभी नामांकित छात्रों को स्वतः अगली कक्षा में प्रमोट किया जाएगा। यह आदेश सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को पालन कराने के लिए दिया गया है।

सहरसा: सरकारी स्कूलों में अब आठवीं तक के बच्चों को अभिभावकों की सहमति के बिना नहीं बनाया जाएगा रिपीटर

सहरसा (नवहट्टा): सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले आठवीं तक के बच्चों को अब बिना अभिभावकों की सहमति के रिपीटर नहीं बनाया जाएगा। यदि किसी अभिभावक को लगता है कि उनके बच्चे के विकास के लिए पिछली कक्षा में एक साल और रुकना जरूरी है, तो वे स्कूल के प्रधानाध्यापक (एचएम) से संपर्क कर सकते हैं।

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इस बाबत नया आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब अभिभावकों की अनुमति के बिना किसी भी छात्र को रिपीटर नहीं बनाया जाएगा। इस आदेश का पालन सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक साहिला ने इस आदेश को लागू करते हुए कहा है कि सभी नामांकित छात्रों को स्वचालित रूप से अगली कक्षा में प्रमोट किया जाएगा। ई-शिक्षाकोष में छात्रों की सूची को अपडेशन किया जाएगा और यदि किसी छात्र को पिछली कक्षा में दोबारा बैठने की आवश्यकता महसूस होती है, तो केवल अभिभावकों की सहमति से यह कदम उठाया जाएगा।

इसके साथ ही स्कूलों में बेहतर अकादमिक वातावरण बनाने के लिए बीईओ और स्कूल के प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया गया है। अधिकारियों द्वारा स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर स्कूल में पूर्व कक्षा का रिवीजन किया जा रहा है, और महीने के अंत में छात्र-छात्राओं की परीक्षा आयोजित हो रही है या नहीं।

इस महीने के अंत में छात्रों की प्रगति का आंकलन किया जाएगा और इस प्रक्रिया के दौरान स्कूलों में अकादमिक रिकॉर्ड को बनाए रखने की भी जांच की जाएगी।

 

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