बिहार: 18वीं विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू, सम्राट चौधरी और विजय कुमार ने ली शपथ

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू, सम्राट चौधरी और विजय कुमार ने ली शपथ
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद 18वीं विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया है। पहले दिन, प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत सम्राट चौधरी से हुई, जिन्होंने शपथ लेने के बाद तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं से हाथ मिलाया और नीतीश कुमार के पैर छुए। इसके बाद विजय कुमार ने भी वही कदम उठाया।
सत्र की शुरुआत के साथ ही विधानसभा में अध्यक्ष के चयन के लिए नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. प्रेम कुमार के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यदि एक से अधिक नामांकन दाखिल होते हैं तो 2 दिसंबर को मतदान कराया जाएगा।
‘पेपरलेस’ सदन: बिहार विधानसभा की कार्यवाही अब डिजिटल होगी
इस बार के शीतकालीन सत्र की खास बात यह है कि सदन की कार्यवाही पूरी तरह से ‘पेपरलेस’ (कागज रहित) होगी। विधानसभा की कार्यवाही ‘नेशनल ई-विधान’ (नेवा) मंच के माध्यम से संचालित होगी, जो भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है। यह मंच विधायी कार्यों को तकनीकी रूप से सक्षम और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें सवाल-जवाब, नोटिस, भाषण, संशोधन प्रस्ताव और मतदान जैसे सभी कार्य डिजिटल माध्यम से होंगे।
सदन के भीतर विधायकों और अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं और उच्च गति वाले वाई-फाई की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, छह बड़े डिस्प्ले स्क्रीन लगाए गए हैं, जिन पर लाइव वोटिंग परिणाम और अन्य जरूरी जानकारी दर्शायी जाएगी। लाइव प्रसारण से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
सदन में एक नया राजनीतिक समीकरण
यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से भी खास है, क्योंकि लगभग दस साल बाद सत्ता पक्ष के पास 200 से अधिक विधायक हैं, जो सदन के समीकरण को पूरी तरह से बदल देंगे। इस बदलाव के बाद, विधायी कार्यों को आगे बढ़ाना सरकार के लिए आसान होगा। वहीं, विपक्षी पक्ष में केवल 38 विधायक रह गए हैं, जिसके चलते उन्हें अपनी भूमिका प्रभावी तरीके से निभाने की चुनौती होगी।
यह बदलाव बिहार की राजनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है, जिसमें सत्ता पक्ष के पास मजबूत बहुमत और विपक्ष के पास सीमित संसाधन होंगे।
