मंत्रियों के धमकी भरे बयानों पर सुप्रिया सुले का हमला—कहा, चुनाव आयोग मूंदी आंखों से देख रहा, लोकतंत्र के लिए खतरनाक

नागपुर: एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने चुनावी विवाद पर की प्रतिक्रिया—कहा, मंत्रियों के धमकी भरे बयान लोकतंत्र के लिए खतरनाक, चुनाव आयोग ने नहीं लिया कोई कदम
नागपुर: राज्य में निकाय चुनाव के दौरान कुछ मंत्रियों द्वारा दिए गए “मतदान नहीं, पैसे नहीं” जैसे विवादित बयानों पर एनसीपी शरद गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने कड़ा बयान दिया है। रविवार को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इन बयानों को गैर-संवैधानिक और लोकतंत्र के लिए खतरे की तरह बताया।
सुले ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे बयानों पर ध्यान दे, लेकिन आयोग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग पर भरोसा होना चाहिए, लेकिन पिछले कुछ दिनों में समाज में बेचैनी और असमंजस का माहौल बढ़ गया है। ऐसे बयान मजबूत लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं।”
सुले ने अनिल देशमुख और सलिल देशमुख विवाद पर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं का योगदान लोगों की सेवा में महत्वपूर्ण है और इस विवाद में ज्यादा सच्चाई नहीं है। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में किसी इमोशन का हक नहीं होता और सभी का ध्यान राज्य और शहर के विकास पर होना चाहिए।
सांसद ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में हर तीन घंटे में सुसाइड जैसी गंभीर समस्याएं हैं और यह राज्य के सामने बड़ा चैलेंज है। उन्होंने जनता और मीडिया से अपील की कि चुनावी बयानों को जरूरत से ज्यादा महत्व न दिया जाए और विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
सुले ने स्पष्ट किया कि सलिल देशमुख जल्द ही चुनावी अभियान में सक्रिय होंगे और राज्य और देश के हित में सभी को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए।
यह बयान निकाय चुनाव के बीच उठ रहे राजनीतिक तनाव और विवादों के बीच आया है, जिससे चुनावी माहौल और गरमाया हुआ है।
