देश के मोस्ट वांटेड माओवादी कमांडर माडवी हिडमा का एक करोड़ रुपये के इनाम के साथ हुआ एनकाउंटर

नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता: माओवादी कमांडर माडवी हिडमा और उसकी पत्नी एनकाउंटर में मारे गए
नागपुर: नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। देश के मोस्ट वांटेड माओवादी कमांडर माडवी हिडमा, जिन पर एक करोड़ रुपये का इनाम था, को आज सुबह आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ बॉर्डर के मारेदुमिली जंगल में सुरक्षाबलों ने एक बड़े एनकाउंटर में मार गिराया। इस एनकाउंटर में हिडमा की पत्नी राजे उर्फ रजक्का समेत कुल छह माओवादी नेता भी मारे गए।
यह ऑपरेशन मंगलवार सुबह सुबह साढ़े छह बजे हुआ, जब आंध्र प्रदेश की विशेष जांच शाखा (SIB), तेलंगाना की ग्रेहाउंड्स, और छत्तीसगढ़ की DRG व कोबरा यूनिट्स ने संयुक्त कार्रवाई की। सुरक्षाबलों को गुप्त सूचना मिली थी कि हिडमा अपनी पत्नी और अन्य माओवादियों के साथ मारेदुमिली जंगल में छिपा हुआ है।
हिडमा, जो 2010 में सीआरपीएफ और 2013 के झिरम घाटी हमले का मुख्य आरोपी था, पर लंबे समय से सुरक्षाबलों की नजर थी। उसकी मौत को नक्सल आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह भाकपा (माओवादी) के सबसे ताकतवर सैन्य विंग ‘पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी’ (PLGA) बटालियन नंबर 1 का कमांडर था।
एनकाउंटर में मारे गए माओवादी:
सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से भारी मात्रा में AK-47 राइफलें, विस्फोटक सामग्री और अन्य अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 30 नवंबर तक हिडमा का एनकाउंटर करने का आदेश दिया था, लेकिन सुरक्षाबलों ने इसे 12 दिन पहले ही अंजाम दे दिया।
हिडमा की मौत से न केवल उसके संगठनात्मक नेटवर्क को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि इससे छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों को भी झटका लगा है। अधिकारियों का मानना है कि हिडमा की मौत से नक्सलियों का मनोबल टूटेगा और आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
सुरक्षाबल इसे एंटी नक्सल अभियान की एक बड़ी जीत मानते हैं और इसे नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
