“चुनाव पूर्व कांग्रेस में गुटबाज़ी, सुनील केदार की बैठक को प्रदेशाध्यक्ष सपकाल ने बताया अवैध, जताई कड़ी नाराज़गी”

कांग्रेस में चुनावी गुटबाज़ी का मामला, सुनील केदार की बैठक को प्रदेशाध्यक्ष सपकाल ने बताया अवैध
नागपुर: आगामी स्थानीय चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर गुटबाज़ी की चर्चा तेज़ हो गई है। नागपुर ज़िले में कांग्रेस के प्रभावशाली नेता और पूर्व मंत्री सुनील केदार द्वारा संभावित उम्मीदवारों के इंटरव्यू लेने को लेकर पार्टी के भीतर हलचल मच गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस बैठक को पूरी तरह से “अवैध” और पार्टी अनुशासन के खिलाफ करार देते हुए कड़ी नाराज़गी जाहिर की है।
दरअसल, ज़िला कांग्रेस चुनाव समिति द्वारा नगर पंचायत, नगर परिषद और जिला परिषद के उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया के लिए एक बैठक बुलाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व मंत्री सुनील केदार ने की। इस बैठक में लगभग 550 संभावित उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए गए। बैठक में विधायक, पूर्व विधायक, पार्टी पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए, जिनमें से कई ने अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी तैयारियों की जानकारी दी।
लेकिन, जैसे ही यह खबर प्रदेश नेतृत्व तक पहुँची, विवाद शुरू हो गया। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बैठक को “अनुशासनहीनता” और पार्टी की स्वीकृति के बिना आयोजित एक “अवैध” बैठक बताया। उन्होंने ज़िला नेतृत्व से स्पष्ट कहा कि बिना प्रदेश स्तर की अनुमति के किसी भी स्तर पर उम्मीदवारों का चयन या इंटरव्यू करना गलत है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस की ओर से पहले ही यह निर्देश जारी किए गए थे कि किसी भी चुनावी बैठक को बिना स्वीकृति के आयोजित न किया जाए, लेकिन इसके बावजूद नागपुर ज़िले में यह बैठक आयोजित की गई, जिससे प्रदेश नेतृत्व में असंतोष बढ़ गया।
सुनील केदार ने इस बैठक को सिर्फ एक “संगठनात्मक चर्चा” करार दिया, जिसमें कार्यकर्ताओं से उनकी राय ली गई थी। उनका कहना था कि यह बैठक केवल आगामी चुनाव की तैयारियों पर केंद्रित थी और किसी भी उम्मीदवार के चयन का निर्णय नहीं लिया गया था।
इसके बावजूद, पार्टी के अंदर कई वरिष्ठ नेताओं ने बैठक पर विरोध जताया और इसे “पूर्व निर्धारित गुटबाज़ी” की शुरुआत करार दिया। कई नेताओं का कहना था कि इस तरह की घटनाएँ पार्टी की एकता और साख को नुकसान पहुंचाती हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी में इस अंदरूनी खींचतान का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों पर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रदेश नेतृत्व इस मुद्दे पर किस प्रकार की कार्रवाई करता है और गुटबाज़ी को काबू करने के लिए क्या कदम उठाता है।
