“शिवसेना को भाजपा में मर्ज करने का मिला आदेश, शशिकांत शिंदे ने एकनाथ शिंदे को लेकर किया बड़ा दावा”

नागपुर: शशिकांत शिंदे का बड़ा दावा, एकनाथ शिंदे को शिवसेना को भाजपा में मर्ज करने का आदेश
नागपुर: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा आलाकमान ने एकनाथ शिंदे को शिवसेना को भाजपा में मर्ज करने का आदेश दिया है। शशिकांत शिंदे ने यह बयान शिवसेना विधायकों के स्मृति भवन में एकत्रित होने पर दिया, और आरोप लगाया कि यह मर्ज करने की प्रक्रिया समन्वय बनाने के लिए की जा रही है।
नागपुर से किसानों को कोई मदद नहीं मिली
नागपुर में आयोजित विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर शशिकांत शिंदे ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस सत्र में नागपुर और विदर्भ को किसानों के मुद्दों पर कोई ठोस मदद नहीं मिली। वह आरोप लगाते हुए बोले कि सेशन के पहले दिन किसानों के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया गया, लेकिन अब तक कोई पक्का कदम नहीं उठाया गया। शिंदे ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े वादे तो करती है, लेकिन उन वादों के लिए पैसा कहां है, यह कोई नहीं बताता।
विदर्भ को न तो पैकेज मिला और न ही न्याय
शशिकांत शिंदे ने आगे कहा कि नागपुर में हुए कन्वेंशन से विदर्भ को कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार पैकेज की घोषणा तो कर रही है, लेकिन क्या उस पैकेज के लिए फंड्स भी हैं? उन्होंने यह भी कहा कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलता, सरकार को वास्तविक बजट और राशि की जरूरत है। विदर्भ के लोग अब इस बारे में सोचने पर मजबूर हो गए हैं।
पुलिस की लापरवाही पर सवाल
इस दौरान शशिकांत शिंदे ने पुलिस की लापरवाही को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि राज्य के दूर-दराज इलाकों में ड्रग्स बनाने वाली फैक्ट्रियां पकड़ी जा रही हैं, जिनमें एक फैक्ट्री उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गांव के पास पाई गई। शिंदे ने यह सवाल उठाया कि पुलिस बार-बार इन इलाकों में जाती है, तो ऐसी फैक्ट्रियों के बारे में उन्हें कैसे जानकारी नहीं मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में शिंदे के करीबी लोग शामिल हो सकते हैं और पुलिस को इस मामले में किसी प्रकार की मदद मिल रही हो सकती है।
सरकार पर बढ़ी आलोचना
शशिकांत शिंदे के बयान से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार के खिलाफ उनके निशाने पर कृषि, विधायिका और कानून-व्यवस्था के कई मुद्दे हैं। उन्होंने न केवल विदर्भ के किसानों के अधिकारों की बात की, बल्कि राज्य सरकार के कामकाज और प्रशासन की नाकामी पर भी जोरदार टिप्पणी की है।
