चक्रवात ‘Ditwah’ से तबाह श्रीलंका का भावुक संदेश: ‘भारत ने सबसे पहले आगे बढ़कर मदद की’

चक्रवात ‘Ditwah’ से बर्बाद श्रीलंका ने जताया आभार, कहा—“भारत ने सबसे पहले बढ़ाया मदद का हाथ”; 410 मौतें, लाखों प्रभावित
कोलंबो में आए भीषण चक्रवात Ditwah ने व्यापक तबाही मचा दी है। भयंकर बाढ़ और लगातार भूस्खलनों ने श्रीलंका के कई हिस्सों की कनेक्टिविटी पूरी तरह तोड़ दी है, बड़ी संख्या में घर, इमारतें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे कठिन समय में भारत द्वारा की गई त्वरित मदद से श्रीलंका की सरकार भावुक हो उठी।
भारत की तत्पर सहायता पर श्रीलंका का भावुक संदेश
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के कार्यालय ने मंगलवार को बयान जारी करते हुए कहा कि आपातकालीन राहत कार्यों में भारत ने सबसे आगे खड़े होकर मदद दी है।
राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को फोन पर राष्ट्रपति दिसानायके से बातचीत की और संवेदना प्रकट की। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुनर्वास, बचाव और राहत की हर आवश्यकता पर भारत पूर्ण सहयोग देगा।
चक्रवात की तबाही: सैकड़ों मौतें, लाखों पर संकट
श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
- 410 लोगों की मौत
- 336 लोग लापता
- 14,66,615 लोग प्रभावित
- 4,07,594 परिवार संकटग्रस्त
कई जिले भूस्खलनों व बाढ़ के कारण कट चुके हैं। सड़क विकास प्राधिकरण के मुताबिक, 256 प्रमुख सड़कें व 15 पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।
भारत का ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू
भारत ने तुरंत राहत अभियान शुरू करते हुए ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ लॉन्च किया है।
इस मिशन के तहत:
- NDRF की दो विशेष टीमें, कुल 80 प्रशिक्षित जवानों के साथ, श्रीलंका भेजी गई हैं।
- यह कदम भारत की “Neighbourhood First” नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
श्रीलंका सरकार ने भी घोषित किया है कि बाढ़ राहत सामग्री पर किसी प्रकार का कस्टम शुल्क नहीं लगाया जाएगा, बशर्ते यह आपदा प्रबंधन निदेशक या रक्षा मंत्रालय के सचिव द्वारा स्वीकृत हो।
चक्रवात Ditwah की तबाही से जूझ रहे श्रीलंका के लिए भारत की त्वरित और निर्णायक सहायता एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है।
