Headline
“यवतमाल: आर्णी में बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की कटाई, जंगली जानवरों और जंगल की सुरक्षा को खतरा”
“नितिन नबीन बने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष, संसदीय बोर्ड का फैसला; बिहार सरकार में मंत्री पद पर हैं वर्तमान में”
“शिवसेना को भाजपा में मर्ज करने का मिला आदेश, शशिकांत शिंदे ने एकनाथ शिंदे को लेकर किया बड़ा दावा”
“एक्शन मोड में कृषि विभाग; बुलढाणा जिले में 317 केंद्रों का निरीक्षण, 33 केंद्रों को बिक्री बंद करने के आदेश”
“विदर्भ सोलर क्षेत्र में बनेगा नंबर एक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंतिम सप्ताह प्रस्ताव में गिनाई सरकार की उपलब्धियां”
“‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस की महारैली, खरगे और राहुल रामलीला मैदान से उठाएंगे हुंकार”
“खटीमा में तुषार की हत्या के बाद हुआ बवाल, पुलिस ने आरोपी हाशिम का किया हाफ एनकाउंटर, धारा 163 भी लागू”
“एसडीपीओ जाधव के निलंबन की मांग पर मुनगंटीवार और वडेट्टीवार ने विधानसभा में किया हंगामा”
नाना पटोले ने राज्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग की, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने खारिज किया

“दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण का कारण पराली जलाना नहीं, रिपोर्ट में सामने आई ‘जहरीली हवा’ की असली वजह”

“दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण का कारण पराली जलाना नहीं, रिपोर्ट में सामने आई ‘जहरीली हवा’ की असली वजह”

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का असली कारण पराली जलाना नहीं, रिपोर्ट में ‘जहरीली हवा’ की असली वजह सामने आई

नई दिल्ली, 2 दिसंबर 2025: दिल्ली और एनसीआर में इस सर्दी में बढ़ते वायु प्रदूषण का मुख्य कारण पराली जलाने की घटनाओं को नहीं बताया गया है, बल्कि इसका असली कारण वाहनों और अन्य स्थानीय स्रोतों से निकलने वाला जहरीला मिश्रण है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की एक नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली में पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का स्तर इस सर्दी में अत्यधिक बढ़ गया है, जो अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है।

सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में अक्टूबर और नवंबर के महीनों के दौरान प्रदूषण का स्तर “बेहद खराब” और “गंभीर” के बीच रहा। इस दौरान प्रदूषण का मुख्य स्रोत वाहनों से निकलने वाला धुआं और अन्य दहन स्रोत थे, जो पीएम 2.5 और CO जैसे खतरनाक तत्वों के रूप में वायुमंडल में घुल गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि 59 दिनों तक किए गए अध्ययन में 30 से अधिक दिनों तक कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर तय सीमा से अधिक दर्ज किया गया।

सीएसई की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जहांगीरपुरी, द्वारका और दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तर परिसर जैसे इलाकों में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सबसे ज्यादा बढ़ा था। इसके अलावा, दिल्ली के कई नए हॉटस्पॉट जैसे विवेक विहार, अलीपुर, और पटपड़गंज भी प्रदूषण के केंद्र बन चुके हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिल्ली-एनसीआर के छोटे शहरों में भी प्रदूषण का स्तर अधिक बढ़ा, खासकर बहादुरगढ़ में, जहां 10 दिन तक स्मॉग की स्थिति रही। इसका कारण भी स्थानीय स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को ही बताया गया है।

अनोखी बात यह है कि इस साल पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं काफी कम रही, जिसका एक कारण बाढ़ के कारण फसल चक्र में बाधा था। बावजूद इसके, दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण और अन्य स्थानीय उत्सर्जन जिम्मेदार हैं।

CSE की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने कहा कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए वाहनों, उद्योगों, अपशिष्ट जलाने और ठोस ईंधनों पर नियंत्रण की सख्त जरूरत है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि धूल नियंत्रण के उपायों पर तो ध्यान दिया जाता है, लेकिन वाहनों और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर कार्रवाई कम हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top