ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में आज बड़ी सुनवाई, नागपुर सहित राज्य के 17 जिलों के नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया पर होगा निर्णय

OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, 17 जिलों के नगर निकाय चुनावों की प्रक्रिया पर होगा फैसला
नागपुर: महाराष्ट्र में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में आज की सुनवाई राज्य के 17 जिलों के नगर निकाय चुनावों के भविष्य का फैसला कर सकती है। खासतौर पर, राज्य में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के चुनाव इस समय चल रहे हैं, और इस फैसले का राज्य के राजनीतिक माहौल पर गहरा असर हो सकता है।
मंगलवार को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में नगर पालिका और नगर पंचायत चुनावों को टालने से इनकार कर दिया था। हालांकि, राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट में स्वीकार किया कि 40 नगर परिषदों और 17 नगर पंचायतों में 50% आरक्षण की सीमा पार हो गई है, जिससे आरक्षण की संरचना पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में आरक्षण की अधिकतम सीमा संविधान में 50% तय है, और आयोग की रिपोर्ट के बाद कोर्ट का फैसला चुनाव प्रक्रिया में बदलाव ला सकता है।
विकास गवली, जिन्होंने इस मामले पर याचिका दायर की है, ने कोर्ट में यह आपत्ति जताई है कि राज्य सरकार ने कई स्थानों पर ओबीसी और अन्य वर्गों को अत्यधिक आरक्षण दे दिया है, जिससे संविधान की निर्धारित सीमा का उल्लंघन हुआ है। वहीं, राज्य सरकार बंथिया कमीशन की रिपोर्ट पेश कर यह दावा कर रही है कि आरक्षण की सीमा कानूनी तौर पर निर्धारित की गई है। अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण होगा।
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा राज्य सरकार से अधिक समय मांगे जाने के बाद, पिटीशनर्स ने इसे चुनाव की तैयारी में देरी का कारण बताया। वे तर्क कर रहे थे कि चुनाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और नामांकन भर चुके हैं, ऐसे में समय में और देरी से चुनाव पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट ने इस पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया, लेकिन यह साफ कर दिया कि चुनाव फाइनल आदेश के दायरे में ही होंगे। इस कारण आज की सुनवाई के परिणाम पर राज्य का पूरा ध्यान केंद्रित है।
इस बीच, अगर सुप्रीम कोर्ट आरक्षण संरचना में कोई बदलाव का आदेश देता है, तो कई जगहों पर उम्मीदवारों के चुनावी टिकट बदलने की संभावना है। राज्य में पहले से ही राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है, और अगर आरक्षण में बदलाव होता है तो यह मामला और गरमा सकता है।
आज की सुनवाई से राज्य की राजनीति में उबाल आ सकता है, और पूरे महाराष्ट्र की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी रहेंगी।
