‘मतदान नहीं तो पैसे नहीं’ विवाद पर CM फडणवीस की प्रतिक्रिया—कहा, चुनाव में कई बातें कही जाती हैं, पर हमेशा सच नहीं होतीं

नागपुर: ‘मतदान नहीं तो पैसे नहीं’ बयान पर CM फडणवीस की सफाई, कहा—चुनावी माहौल में कही हर बात तथ्य नहीं होती; शिंदे–फडणवीस मतभेद की खबरों को बताया फर्जी
नागपुर: राज्य में चुनावों की हलचल के बीच “मतदान नहीं तो पैसे नहीं” जैसे बयान पर उठे विवाद ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि चुनावी भाषणों में कही जाने वाली हर बात को सच या आधिकारिक रुख नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी पार्टी या नेता जनता के साथ भेदभाव करने की नीयत नहीं रखता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महागठबंधन की तीनों पार्टियाँ—कुछ जगह एक साथ और कुछ जगह अलग—चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन लक्ष्य एक ही है: “महाराष्ट्र के हर शहर का विकास।” फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि चुनाव बाद राज्य के सभी शहरी क्षेत्रों में तेज़ी से विकास कार्य होंगे।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने एकनाथ शिंदे और उनके बीच बढ़ती दूरी की राजनीतिक चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा,
“यह पागलों का बाजार है। कुछ मीडिया भी इसमें शामिल हो जाता है। सच यह है कि हम लगातार साथ में कार्यक्रम कर रहे हैं, बात कर रहे हैं। अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों के आधार पर फैलाया जा रहा भ्रम बिल्कुल गलत है।”
नागपुर बुक फ़ेस्टिवल और ‘ज़ीरो माइल लिटफ़ेस्ट’ के उद्घाटन में फडणवीस ने नई तकनीक के दौर में किताबों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई जानकारी तो दे सकता है, परंतु “असली ज्ञान किताबों से ही मिलता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य और पुस्तकों से जुड़े ऐसे आयोजन नागपुर के बौद्धिक माहौल को समृद्ध करेंगे और रचनात्मक चर्चाओं का मंच तैयार करेंगे।
फडणवीस की इस टिप्पणी के बाद चुनावी बयानबाज़ी से जुड़ा विवाद कुछ हद तक शांत पड़ने की उम्मीद है, वहीं राजनीतिक हलकों में शिंदे–फडणवीस मतभेद की चर्चाओं पर भी विराम लगने की संभावना है।
