Headline
“यवतमाल: आर्णी में बड़े पैमाने पर सागौन के पेड़ों की कटाई, जंगली जानवरों और जंगल की सुरक्षा को खतरा”
“नितिन नबीन बने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष, संसदीय बोर्ड का फैसला; बिहार सरकार में मंत्री पद पर हैं वर्तमान में”
“शिवसेना को भाजपा में मर्ज करने का मिला आदेश, शशिकांत शिंदे ने एकनाथ शिंदे को लेकर किया बड़ा दावा”
“एक्शन मोड में कृषि विभाग; बुलढाणा जिले में 317 केंद्रों का निरीक्षण, 33 केंद्रों को बिक्री बंद करने के आदेश”
“विदर्भ सोलर क्षेत्र में बनेगा नंबर एक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंतिम सप्ताह प्रस्ताव में गिनाई सरकार की उपलब्धियां”
“‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कांग्रेस की महारैली, खरगे और राहुल रामलीला मैदान से उठाएंगे हुंकार”
“खटीमा में तुषार की हत्या के बाद हुआ बवाल, पुलिस ने आरोपी हाशिम का किया हाफ एनकाउंटर, धारा 163 भी लागू”
“एसडीपीओ जाधव के निलंबन की मांग पर मुनगंटीवार और वडेट्टीवार ने विधानसभा में किया हंगामा”
नाना पटोले ने राज्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग की, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने खारिज किया

चंद्रपुर महापालिका चुनाव: टिकट फॉर्म को लेकर BJP में घमासान, कार्यकर्ता उलझे—‘किसके कार्यालय से लें फॉर्म?’

चंद्रपुर महापालिका चुनाव: टिकट फॉर्म को लेकर BJP में घमासान, कार्यकर्ता उलझे—‘किसके कार्यालय से लें फॉर्म?’

चंद्रपुर: महापालिका चुनाव से पहले BJP में उठी गुटबाजी की लपटें, टिकट फॉर्म को लेकर कार्यकर्ता उलझे

चंद्रपुर। नगर निगम चुनाव करीब आते ही भाजपा में टिकट वितरण को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। 16 नवंबर से शुरू हुए नामांकन आवेदन फॉर्म वितरण के पहले ही दिन स्थिति ऐसी बन गई कि पार्टी कार्यकर्ता ही यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि फॉर्म आखिर किस कार्यालय से लिया जाए।

दरअसल, भाजपा के दो प्रमुख गुट अपनी–अपनी ओर से टिकट फॉर्म बांट रहे हैं। एक तरफ विधायक किशोर जोरगेवार के कार्यालय से फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं और निर्देश दिया गया है कि भरे हुए फॉर्म भी वहीं जमा किए जाएं। वहीं दूसरी ओर विधायक सुधीर मुनगंटीवार के कार्यालय से भी समान फॉर्म बांटे जा रहे हैं, जिन्हें वहीं पर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दूसरी प्रक्रिया की कमान राहुल पावड़े को सौंपी गई है।

पार्टी के भीतर गुटबाजी का यह दृश्य नया नहीं, लेकिन महापालिका चुनाव से ठीक पहले इसकी तीव्रता बढ़ती दिख रही है। अब स्थिति यह है कि फॉर्म लेने से लेकर फॉर्म जमा करने तक दोनों गुट अपनी-अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।

इसकी वजह से कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है और पार्टी गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है—“किसका फॉर्म लें?”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह खींचतान आने वाले दिनों में टिकट चयन की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top