सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: 8 हफ्तों में सभी सरकारी संस्थानों में बाड़ लगाएं, हाईवे से हटाए जाएं आवारा पशु

आवारा पशुओं पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, हाईवे से जानवर हटाने और सरकारी संस्थानों में 8 हफ्ते में फेंसिंग का आदेश
नई दिल्ली: देशभर में बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय बेंच ने यह आदेश तीन प्रमुख हिस्सों में जारी किया है, जिसमें हाईवे से जानवरों को हटाने, सरकारी संस्थानों में बाड़ लगाने और राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट मांगने के निर्देश शामिल हैं।
पहला हिस्सा – राज्यों से रिपोर्ट तलब
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करें, जिसमें बताया जाए कि आवारा पशुओं से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि अमिकस क्यूरी की रिपोर्ट को आदेश का हिस्सा माना गया है, और यदि किसी भी राज्य ने ढिलाई दिखाई या आदेशों का पालन नहीं किया, तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा।
दूसरा हिस्सा – हाईवे और सड़कों से आवारा जानवर हटाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से आवारा जानवरों को तुरंत हटाया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह संयुक्त अभियान के रूप में चलाया जाए ताकि सड़कों, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर भटकते जानवरों से दुर्घटनाओं का खतरा खत्म हो। इन जानवरों — विशेषकर गाय और भैंस जैसे मवेशियों — की देखभाल और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी।
तीसरा हिस्सा – सरकारी संस्थानों में बाड़ लगाने का आदेश
बढ़ते कुत्तों के हमलों और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वे दो हफ्तों में अपने सरकारी संस्थानों की पहचान करें — जैसे अस्पताल, रेलवे स्टेशन, स्कूल, खेल परिसर आदि — और वहां 8 हफ्तों के भीतर फेंसिंग (बाड़) लगाना सुनिश्चित करें, ताकि आवारा कुत्ते अंदर न घुस सकें।
प्रत्येक सरकारी संस्थान को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, जो परिसर की देखरेख करेगा। स्थानीय निकायों को नियमित निरीक्षण करने और आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के बाद शेल्टर में रखने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि कुत्तों को दोबारा उसी जगह पर छोड़ना प्रतिबंधित रहेगा, वरना पूरी कार्रवाई व्यर्थ हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर राज्यों ने इन आदेशों को निर्धारित समयसीमा में लागू नहीं किया, तो संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि यह आदेश जनहित, सुरक्षा और पशु कल्याण — तीनों के संतुलन को ध्यान में रखकर दिया गया है।
