पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए वोट चोरी का लगाया गंभीर आरोप

पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने राज्य सरकार पर निशाना साधा, सोयाबीन खरीद और वोटिंग घोटाले के आरोप लगाए
अमरावती: रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की और किसानों के हित में सोयाबीन की तत्काल खरीद शुरू करने की मांग की। देशमुख ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों के नुकसान को नजरअंदाज कर रही है और सरकार के निष्क्रिय रवैये के कारण स्थानीय किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा, “राज्य में 11 प्रतिशत कपास विदेशों से आयात हो रही है, जिससे स्थानीय किसानों को नुकसान हो रहा है।”
मतदाता सूची में घोटाले को लेकर भी देशमुख ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि शनिवार को मुंबई में एक सर्वदलीय मार्च आयोजित किया गया था, जिसमें मतदाता सूचियों में गड़बड़ियाँ पाए जाने का मुद्दा उठाया गया। देशमुख ने आरोप लगाया, “ईवीएम और मतदाता सूचियों में गंभीर अनियमितताएँ हैं। इन सूचियों में बाहरी राज्यों के नाम शामिल हैं और मुंबई नगर आयुक्त के सरकारी आवास पर 120 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं, जो कि पूरी तरह से संदिग्ध हैं।”
इसके अलावा, देशमुख ने चुनाव आयोग पर पक्षपाती होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग सवालों का जवाब नहीं देता, जबकि भाजपा हमेशा प्रतिक्रिया देती है।” देशमुख ने यह भी खुलासा किया कि अमरावती जिले में 10,000 से ज्यादा फर्जी मतदाता हैं और कुछ के नाम विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भी दर्ज हैं।
पूर्व गृह मंत्री ने सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “लोकसभा चुनाव के बाद, सत्ताधारी पार्टी ने अपनी हार मानने के बावजूद महज चार महीनों में 70 लाख नए मतदाताओं का पंजीकरण करा लिया। यही घोटाले इस सरकार की सत्ता में आने का कारण बने हैं।”
देशमुख के इन आरोपों से राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है, और यह मामला अब चुनाव आयोग और राज्य सरकार के लिए चुनौती बन गया है।
