अमरावती: पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत, थानेदार समेत 9 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज

अमरावती: पुलिस हिरासत में नितेश मेश्राम की मौत — 17 महीने बाद थानेदार सहित 9 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज
अमरावती जिले के चांदूर रेलवे थाने में हुई नितेश मेश्राम की पुलिस हिरासत में मौत के मामले ने 17 महीने बाद नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में तत्कालीन थानेदार अजय कवदुजी अहिरकर समेत कुल 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मेश्राम परिवार लंबे समय से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा था, और अब आखिरकार उन्हें न्याय की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है।
आरोपियों में थानेदार के अलावा पुलिसकर्मी राजकुमार मुलमचंद जैन, विशाल मुकुंदराव रंगारी, प्रवीण रामदास मेश्राम, अलीम हाकिम गवली, अमोल अमृतराव घोडे, प्रशांत ढोके और दो महिला कर्मचारी शामिल हैं। परिवार का आरोप है कि हिरासत के दौरान हुई मारपीट से नितेश मेश्राम की हालत बिगड़ गई थी, जिसके चलते जेल प्रशासन ने उन्हें अमरावती के इरविन अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई।
14 जून 2024 को अकोला मेडिकल कॉलेज में उनका इन-कैमरा पोस्टमार्टम किया गया था। 28 जून को जारी रिपोर्ट में साफ कहा गया कि मेश्राम के शरीर पर 16 गंभीर चोटें थीं, जो उनकी मृत्यु का कारण बनीं। इसके बावजूद, परिवार का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने अपने सहयोगियों को बचाने की कोशिश की।
इस मामले ने राज्य स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष एडवोकेट धर्मपाल मेश्राम ने 13 जनवरी को चांदूर रेलवे पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। इसके बाद आयोग ने नागपुर में दो बैठकें (27 जनवरी और 17 फरवरी) आयोजित कीं और जांच में लापरवाही तथा विसंगतियों पर नाराज़गी जताई।
आयोग ने पुलिस को निर्देश दिए थे कि इस मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया जाए। आयोग की सिफारिशों और जांच के आधार पर, अब संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई न केवल मेश्राम परिवार के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है।
