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छगन भुजबल समाज के ‘पितातुल्य’, वडेट्टीवार के बयान पर तायवाड़े ने जताई कड़ी निंदा

छगन भुजबल समाज के ‘पितातुल्य’, वडेट्टीवार के बयान पर तायवाड़े ने जताई कड़ी निंदा

नागपुर: राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ प्रमुख बबनराव तायवाड़े ने छगन भुजबल के विरोधी बयान की निंदा की, कहा—‘भुजबल हैं समाज के पिता तुल्य, सार्वजनिक अपमान सही नहीं’

राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के प्रमुख बबनराव तायवाड़े ने मंत्री छगन भुजबल द्वारा कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के खिलाफ की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। शनिवार को नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान तायवाड़े ने कहा कि छगन भुजबल ओबीसी समाज के वरिष्ठ नेता और पिता जैसे हैं, इसलिए किसी भी नेता की पिछली गलतियों को सार्वजनिक मंच पर वीडियो दिखाकर अपमानित करना अनुचित है।

तायवाड़े ने बताया कि बीड में हुई महा एल्गार मीटिंग में मनोज जरांगे पाटिल के साथ वडेट्टीवार का पुराना वीडियो दिखाया गया था, जिसमें उन्होंने मराठा आरक्षण के समर्थन की बात कही थी। उन्होंने माना कि वडेट्टीवार का बयान गलत था, लेकिन इस गलती को बार-बार सार्वजनिक रूप से उजागर करना उचित नहीं है।

विदर्भ में वडेट्टीवार की ताकत को नकारा नहीं जा सकता

तायवाड़े ने कहा, “नागपुर में वडेट्टीवार ने बड़ा ओबीसी मार्च निकाला, यह कोई भूल नहीं सकता कि विदर्भ में उनकी ही सबसे अधिक पकड़ है। इसलिए भुजबल जैसे वरिष्ठ नेताओं को चाहिए था कि वे व्यक्तिगत रूप से वडेट्टीवार से बात करते, बजाय सार्वजनिक मंच पर उनका अपमान करने के।”

ओबीसी रिजर्वेशन पर GR का कोई नकारात्मक असर नहीं

अपने पुराने रुख को दोहराते हुए तायवाड़े ने कहा कि 2 सितंबर के सरकारी आदेश (GR) का ओबीसी रिजर्वेशन पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि इस आदेश के बाद अब तक सिर्फ 27 लोगों को कुनबी सर्टिफिकेट मिला है, जबकि यदि आदेश में कोई व्यापक बदलाव होता तो मराठा समुदाय के हजारों लोग प्रमाणपत्र के लिए कतार में होते।

उन्होंने कहा, “हमारे बीच कुछ मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ओबीसी समाज के हित के लिए हम सभी मिलकर काम करेंगे और भविष्य में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे।”

इस बयान से ओबीसी समाज के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान और सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप पर एक नई बहस शुरू हो गई है, जो आगामी दिनों में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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