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इतवारी-उमरेड़ रेलवे लाइन का पहला चरण पूर्ण, जुलाई से शुरू होगा रेल यातायात

इतवारी-उमरेड़ रेलवे लाइन का पहला चरण पूर्ण, जुलाई से शुरू होगा रेल यातायात

इतवारी-उमरेड़ रेलवे लाइन का पहला चरण पूरा, जुलाई से कोयला परिवहन की तैयारी – नागपुर क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

नागपुर, 18 जून: नागपुर से उमरेड़ को जोड़ने वाली इतवारी-उमरेड़ रेलवे लाइन के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। नैरो गेज से ब्रॉड गेज में बदली जा रही इस आधुनिक रेलवे लाइन पर जुलाई 2025 से मालगाड़ियों के चलने की संभावना है। परियोजना को महाराष्ट्र रेल अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (MRIDC) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है और अब यह रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के निरीक्षण की प्रतीक्षा में है, जो जून के अंत तक संभावित है।

कोयला परिवहन को मिलेगा बड़ा लाभ

शुरुआत में इस लाइन का उपयोग मालवाहन के लिए किया जाएगा, विशेष रूप से वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के कोयला खनन क्षेत्रों से कोयले के तेज और कुशल परिवहन हेतु। नई ब्रॉड गेज लाइन के शुरू होने से कोराडी और खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट्स तक कोयला भेजने में समय की बचत होगी—जहां पहले 22 घंटे लगते थे, वहीं अब यह दूरी महज 4 घंटे में तय की जा सकेगी।

इसके अतिरिक्त, मौदा स्थित एनटीपीसी और तिरोड़ा स्थित अदाणी पावर प्लांट को भी इस रूट से कोयले की आपूर्ति की जा सकती है। इससे केवल औद्योगिक क्षेत्र को ही नहीं, बल्कि नागपुर के ग्रामीण इलाकों—जैसे उमरेड और कुही तहसील—के किसानों और यात्रियों को भी लाभ होगा, क्योंकि कृषि उत्पादों की ढुलाई और नागपुर तक की यात्रा अधिक सस्ती और सुलभ हो जाएगी।

लंबे इंतजार के बाद मिली रफ्तार

इस परियोजना को केंद्र सरकार ने 2013-14 में मंजूरी दी थी, लेकिन बजट की कमी, कोविड-19 महामारी और वन विभाग की बाधाओं के चलते इसे लंबे समय तक विलंब का सामना करना पड़ा। दिसंबर 2019 में निर्माण कार्य आरंभ हुआ और अब, लगभग साढ़े पांच साल बाद, इसका पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

परियोजना की व्यापक तस्वीर

यह पूरी परियोजना इतवारी-नागभीड़ ब्रॉड गेज रेलवे लाइन के 106 किमी के विस्तार का हिस्सा है। इसमें से इतवारी से उमरेड़ तक 55 किमी की दूरी अब पूरी हो चुकी है। वहीं उमरेड़ से भिवापुर तक के 12 किमी खंड का काम अंतिम चरण में है। पूरी लाइन के दिसंबर 2025 तक चालू होने की उम्मीद है।

यह रेलवे लाइन केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि नागपुर जिले के पूर्वी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार बनने जा रही है। स्थानीय लोगों को इससे बेहतर कनेक्टिविटी, कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और जीवन की गति को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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