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राज्य सरकार का बड़ा फैसला: एसटी महामंडल पांच विभागों में विभाजित, नागपुर और अमरावती में बनेंगे नए विभागीय कार्यालय

राज्य सरकार का बड़ा फैसला: एसटी महामंडल पांच विभागों में विभाजित, नागपुर और अमरावती में बनेंगे नए विभागीय कार्यालय

एसटी महामंडल का बड़ा पुनर्गठन: राज्य सरकार ने पांच क्षेत्रीय विभाग किए गठित, नागपुर और अमरावती में खुलेंगे नए कार्यालय

नागपुर, 15 जून — राज्य सरकार ने महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी महामंडल) के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए इसे अब पांच क्षेत्रीय विभागों में विभाजित करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय शनिवार को औपचारिक अधिसूचना के माध्यम से सार्वजनिक किया गया। अब मुंबई, नाशिक, पुणे, नागपुर और अमरावती में क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जाएंगे।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि यह निर्णय विशेषकर त्योहारों, विशेष ट्रेनों और मेले जैसे अवसरों पर यात्रियों को बेहतर सेवा, समयबद्धता और नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि निर्णय की प्रेरणा उन्हें हाल ही में कर्नाटक दौरे के दौरान मिली, जहां राज्य परिवहन निगम का विकेंद्रीकृत मॉडल अधिक प्रभावशाली रूप से कार्य कर रहा है।

केंद्रीकरण के कारण हो रही थी देरी

एसटी महामंडल की अब तक की त्रिस्तरीय संरचना — डिपो (तालुका स्तर), विभागीय कार्यालय (जिला स्तर) और केंद्रीय कार्यालय (राज्य स्तर) — में सीधे संवाद और त्वरित निर्णय लेने में बाधाएं सामने आ रही थीं। त्योहारी सीजन, विशेष ट्रैफिक योजनाओं और मेले जैसे आयोजनों में अक्सर निर्णयों में देरी होती थी, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और निगम के राजस्व दोनों पर असर पड़ता था।

पांच क्षेत्रीय मुख्यालय तय

अब गठित पांच क्षेत्रीय प्रभागों — मुंबई, पुणे, नाशिक, नागपुर और अमरावती — में स्थायी मुख्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक प्रभाग के लिए प्रशासनिक अधिकारी, नियंत्रण समितियां और निगरानी तंत्र नियुक्त किए जा रहे हैं। इसके ज़रिए एसटी निगम स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तुरंत निर्णय ले सकेगा और अपनी सेवा की गुणवत्ता में सुधार ला सकेगा।

उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. माधव कुसेकर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे कार्यान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाएं और जल्द से जल्द कार्यालयों को शुरू कर सेवा संचालन सुनिश्चित करें।

इस कदम को परिवहन क्षेत्र में एक दूरदर्शी बदलाव माना जा रहा है, जिससे राज्य के कोने-कोने तक परिवहन सेवा को अधिक सशक्त, जवाबदेह और यात्री-केंद्रित बनाया जा सकेगा।

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